देश तभी बचेगा, जब हमारी सोच गुलामी की ज़ंज़ीर से आज़ाद होगी। किसी का फैन या भक्त मत बनिए। हमारे नौजवान खुद सोचे, तय करे की उसे क्या चाहिए, क्या नहीं। आप सवाल करना सीखिए। किसी के पीछे आँख मूँद कर चलना भी एक तरह की गुलामी है। जब तक आप ज़िम्मेदारों से सवाल करना नहीं सीखेंगे, उन्हें इनकी जिम्म्मेदारी का एहसास नहीं कराएँगे वो आराम से हमारी-आपकी कमाई पर मजे लूटते रहेंगे। ज़िम्मेदारी का एहसास कराना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, जिस दिन आप अंधे बहरे होकर चलेंगे, हुक्मरानों से सवाल करना छोड़ देंगे दरअसल उसी दिन हमारी ज़िंदा ज़म्हूरियत दफ़न हो जाएगी। बहुत क़ुर्बानियों के बाद हमने कुछ पाया है। याद रखिये .. हम नौजवान इस मुल्क की सबसे बड़ी ताकत और उम्मीद हैं। अगर इसे क्रांति में बदल दिया जाये तो बड़ी से बड़ी सत्ता को उखाड़कर फ़ेंक सकता है। हमें किसी भी कीमत अपनी एकता और इंसानियत को नहीं मरने देना चाहिए। किसी भी हालत में इस उम्मीद को टूटने मत देना दोस्तों।
इंक़लाब ज़िंदाबाद।
यौमे आज़ादी की 71वीं सालगिरह मुबारक हो

बहुत बढ़िया बाबू.. ऐसे ही लिखते रहो.. खूब सारा आशीर्वाद
ReplyDeleteशुक्रया सर
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